Thursday, January 20, 2011

क्यों आए तुम !!

जला के मैंने तुम्हारी आरजू , जिंदगी को अपनी दफ़न कर दिया 
हँसते मुस्कुराते चेहरे पर अपने, उदासी का कफ़न जड़ दिया 

अलग थे रास्ते अलग थी मंजिले 
फिर क्यों थोड़ी दूर भी साथ चले

वादा कर दिया जब हमने जिंदगी भर साथ निभाने के लिए 
तुम कहते हो की खेल रहे थे तुम हमे आजमानें के लिए 

बन गए हो ख्वाब बनकर सीने में इस कदर 
और चैन की नींद में हो तुम इन सबसे बेखबर

आज खुदको देखा आईने में तो एक अलग इंसान नज़र आ गया
ऐसा क्या नशा है तुम्हारा की मुझे ऐसा बना गया

मोहब्बत ही तो की कौनसा गुनाह कर दिया
बस गलती यही हुई की जो भी किया वो बेपनाह कर दिया

अब दिल चाहता है कहीं दूर चले जाने को
याद न आओ तुम कुछ ऐसा वक़्त बिताने को

जला के मैंने तुम्हारी आरजू , जिंदगी को अपनी दफ़न कर दिया 
हँसते मुस्कुराते चेहरे पर अपने, उदासी का कफ़न जड़ दिया ||

9 comments:

  1. Thanks Simran :)

    And Dheeraj what is that????

    ReplyDelete
  2. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  3. जला के मैंने तुम्हारी आरजू , जिंदगी को अपनी दफ़न कर दिया
    हँसते मुस्कुराते चेहरे पर अपने, उदासी का कफ़न जड़ दिया ||

    wah wah....good job...

    ReplyDelete
  4. Kya bataun is ke comment me.... Mohabbat hamesha bepanah hi hoti hai.... Agar mohabbat bepanah nehi hoti to wo mohabbat nehi kehlaati.... So, please never regret of loving someone off limits.... All the best !!!

    ReplyDelete