Saturday, January 29, 2011

Let it be…!!


And I met you once again
May be the last time…
With all my smile and excitement
To capture your smiling face in my eyes forever
To record your voice and to hear echo’s of it in my mind
To feel you always near...

Time always go little fast with you
Knowing that this is the last time
I wasn’t able to say something
And finally thought…. Let it be…!!
 Seeing you always makes my day
You can’t even imagine what you are
For someone who love’s you
But anyway…. Let it be…!!

Though I am not much expressive
I wish you could have seen something
In my eyes, at my face…in my heart
I heard love doesn’t need words...
But its ok…. Let it be..!!
The only thing I know is I am happy…because you are happy
Life will just go on…. Let it be..!! 

Thursday, January 27, 2011

सुलगती हुई जिंदगी...

This poem is dedicated to all Smokers.....

धीरे से सुलगती हुई जब साँसों में तू जाती है
लगता है ऐसे जैसे जन्मो की प्यास बुझाती है
हर मुश्किल हर परेशानी में बस याद तेरी ही आती है
ना मिले तू तो जैसे जान पर बन आती है
हम हर मिनट हर लम्हा बस तुझे ही सुलगाते रहे
अपनी ही जिंदगी को यू धुए में उड़ाते रहे
जानते है जिंदगी घट रही है हर कश के साथ
फिर भी हर कश के बाद ना जाने क्यों मुस्कुराते रहे

आज हम हैं यहाँ इस बिस्तर पर मौत के इंतज़ार में
सोचते है क्यों पड़े इस धुए के प्यार में
जब जानते थे की मिल रही है मौत हमे उपहार में
अब बंद किया है ढूंढना जीत अपनी हर एक हार में
अब बंद किया है ढूंढना जीत अपनी हर एक हार में||


Smoking kills!!!!! ...Mind it!!

Wednesday, January 26, 2011

Just give me your love...


Slowly you are moving out of my world
Leaving me alone to feel the curse
With all those moments all those memories
I can just see you going so far

Feels like I stuck somewhere
Pushing my life to be on track
Asking you to give my heart back
And I am sorry for all interfere

I know it is very hard for you
But there is easy way too
Just give me your love and smile for me
Just give me your love and smile for me

Monday, January 24, 2011

जंग...

यह कविता एक सैनिक के दिल का हाल बताती है|

जंग से पहले ......

जिंदगी की डोर को हाथ में ले उससे पतंग की तरेह उड़ाते रहे
कभी कांटो में उलझाया तो कभी हवा में झुलाते रहे
जूनून था सर पर कुछ कर गुजर जाने का
इस तमन्ना की खातिर बस खुदको अजमाते रहे
तंग हो गए जब आग की लपटों से
झूठे वादे और इन आतंकी कपटीयों से
आज हमने फिर बन्दूक उठाई है
दुश्मन छुप ले जहाँ छुपना है
आज तुझे लेने तेरी मौत आई है||

और जब जंग जीत जाते हैं ...........

सोचा था शान्ति होगी इस जंग के बाद
अमन का पैगाम आएगा कुछ चीखों के बाद
पर चिराग लेकर अब हम लाशें ढूँढा करते हैं
नफरत दुश्मन से नहीं अब अपने आप से किया करते हैं
अब हर और बर्बादी का मंजर नज़र आता है
हर इंसान के हाथ में एक खंजर नज़र आता है
कहा करते थे ये धरती माँ है हमारी
आज हर कतरा इसका बंजर नज़र आता है
बस हर और बर्बादी का मंजर नज़र आता है||

Saturday, January 22, 2011

अच्छे थे वो पल...

आज पुरानी अलमारी में वो किताब नज़र आ गई
बचपन की तस्वीरो से कुछ याद मुझे दिला गई

अच्छे थे वो पल की जब चाहो तब रो लेते थे
और खिलौने ही दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी दे देते थे

रातों को जब हम यूँ चैन की नींद सो जाते थे
जब पापा आकर रात को चादर हमें उड़ाते थे

अच्छे थे वो पल जब सब साथ घूमने जाते थे
सी-सी करते हुए भी हम खूब पानीपूरी खाते थे

त्योहारों पर जब हम खूब उछलते गाते थे
जब मौसी मौसा आकर गोदी में हमे उठाते थे

अच्छे थे वो पल जब डर ना किसी बात का था
जब प्यार का मतलब सिर्फ सर पर दादी का हाथ था

याद करके ये सब कुछ आँखे मेरी भीगा गई
बचपन की तस्वीरे फिर याद सब दिला गई ||

Friday, January 21, 2011

डर लगता है...

डर लगता है जिंदगी से की इसे खो ना दूँ कहीं
डर  लगता है निकलने में बाहर की रो न दूँ कहीं

उठा सकूँ नज़र जमीं से इतनी हिम्मत ही नहीं
ढूंढ रहा हूँ कुछ अपना जो खोया है यहीं कहीं


क्यों उसकी सिर्फ याद से दिल सहम जाता है
क्यों मुझे आजकल अपने आप पर रहम आता है

डर लगता है खुशियों से की वो कल लौट जाएंगी
फिर याद आ आ कर मुझे यूँ ही रुलाएंगी
धागा धागा करके खुल रही है ये जिंदगी की डोर
मधुर संगीत भी लगता है जैसे मचा रहा हो कोई शोर

बस अब चारो और अँधेरा है और शान्ति सी छाई है
जिंदगी में बस अब तन्हाई ही तन्हाई है

डर लगता है जिंदगी से की इसे खो ना दूँ कहीं
डर  लगता है निकलने में बाहर की रो न दूँ कहीं ||

Thursday, January 20, 2011

क्यों आए तुम !!

जला के मैंने तुम्हारी आरजू , जिंदगी को अपनी दफ़न कर दिया 
हँसते मुस्कुराते चेहरे पर अपने, उदासी का कफ़न जड़ दिया 

अलग थे रास्ते अलग थी मंजिले 
फिर क्यों थोड़ी दूर भी साथ चले

वादा कर दिया जब हमने जिंदगी भर साथ निभाने के लिए 
तुम कहते हो की खेल रहे थे तुम हमे आजमानें के लिए 

बन गए हो ख्वाब बनकर सीने में इस कदर 
और चैन की नींद में हो तुम इन सबसे बेखबर

आज खुदको देखा आईने में तो एक अलग इंसान नज़र आ गया
ऐसा क्या नशा है तुम्हारा की मुझे ऐसा बना गया

मोहब्बत ही तो की कौनसा गुनाह कर दिया
बस गलती यही हुई की जो भी किया वो बेपनाह कर दिया

अब दिल चाहता है कहीं दूर चले जाने को
याद न आओ तुम कुछ ऐसा वक़्त बिताने को

जला के मैंने तुम्हारी आरजू , जिंदगी को अपनी दफ़न कर दिया 
हँसते मुस्कुराते चेहरे पर अपने, उदासी का कफ़न जड़ दिया ||